Ghazal #8


ख़ुश्क आंखों में तू सहरा बसा दे
किसी दरिया से समंदर मिला दे

आसमां तुझे ज़ोम है अंधेरों पे अपने
तो वो एक चांद और कुछ तारे गिरा दे

पड़ा जाता है मेरा बदन नीला
मेरी ज़ात में कुछ रात मिला दे


सहरा – desert
ज़ोम – pride
ज़ात – being

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थोड़ी सी उदासी है

कितना ख़ामोश समां है
थोड़ा सा अंधेरा है
मैं हुं और आसमां है
और थोड़ी सी उदासी है

जो मिल सका मिला है
किसी से न कुछ गिला है
ये मैं हुं वो काफिला है
और थोड़ी सी उदासी है

कुछ सुक़ून मिला है लिख के
कलम के हाथ बिक के
कुछ और देखुं लिख के
क्योंकि थोड़ी सी उदासी है

ज़िद पूरी कर ली सारी
भूली सभी लाचारी
मंज़िल को पा लिया है
पर थोड़ी सी उदासी है

ऐसा ना हो कभी के
तोडू़ं मैं दिल सभी के
तूफान बन ना जाये
जो थोड़ी सी उदासी है

सब ख़त्म कर मैं दूँगा
शायद ख़ुश मैं तब रहूँगा
क्या चाहती है ये जो
थोड़ी सी उदासी है

इस ख़ामोश से समां में
अंधेरे के रास्ते में
मुझे आप कैसे दिख गये
मुझे आप कैसे मिल गये
क्या मेरी तरह भी आपको
थोड़ी सी उदासी है

Ghazal #5


ऐसा है हाल ए दिल के अब रहा नहीं जाता
ज़ब्र ए ज़ब्त तो देखो कि कहा नहीं जाता

और कितनी सांसों की गुंज़ाइश है मुझमें
या ख़ुदा ये दर्द अब सहा नहीं जाता

लाओ भले लहर या फिर सैलाब ले आओ
बहा नहीं जाता तो फिर बहा नही जाता

दूसरी मोहब्बत में होता ही यही है
गले लगाया जाता है चाहा नहीं जाता


ज़ब्र ए ज़ब्त = compulsion of self-control

सैलाब = flood

Ghazal #4


आँसू बहुत हैं तो ये काम कर ही जायेंगे
सहरा तेरे सराबों को हम भर ही जायेंगे
AaNsun bht hai so ye kaam kr hi jaeNge
Sahra tere sairaaboN ko ham bhar hi jaeNge

शोर में तो ख़ैर कब लगता था दिल मेरा
पर ऐसी ख़ामोशी में तो हम मर ही जायेंगे
Shor mai to khair kab lgta tha dil mera
Par esi khamoshi mai to ham mar hi jaeNge

कहना आसमाँ से के वो दर खुला रखे
दश्त से निकलेंगे तो फिर घर ही जायेंगे
Kehna aasmaN se ke wo dar khula rkhe
Dasht se niklege to phr ghar hi jaeNge

और हम से ले भी क्या सकती थी ये दुनिया
हम से दीवनों के तो बस सर ही जायेंगे
Aur ham se le bhi kya skti thi ye duniya
Ham se deewanon k to bas sar hi jaeNge

ऐसे अनासिर से बना है मेरा बदन
जितना भी संभालो मगर बिख़र ही जायेंगे
Na jane kese anasir se bana hai mera badan
Jitna bhi sambhalo magar bikhar hi jaeNge


Sahara= desert

Sarabon = Mirages

Dar= door

Dasht= desert

Anasir= particles

Ghazal #3


अपनी वोही रीत आज हमने निभा डाली
नयी पनपती लौ-ए-इश्क़ हमने बुझा डाली

इक ख़्वाब को निचोड़ा और लहू किया जमा
फिर अपने ख़ून-ए-चश्म से तस्वीर बना डाली

बुझने लगी थी आग सो हमने तो यूं किया
कुछ अश्क़ थोड़े ख़्वाब और थोड़ी हवा डाली

इतरा रहा था क़ैस जब दश्त में मिला
हमने भी थोड़ी वहशतें अपनी गिना डाली

मौत तो आनी ही थी पर ग़म रहा मुझे
क्यों ज़िंदगी ज़रूरत से ज़्यादा निभा डाली

पिघली मेरी नज़र उसके बदन पे जब
उसने भी आंखों से खरी खोटी सुना डाली

तेरी याद की हलचल मकान-ए-दिल में रहती थी
कल रात तो सारी फ़सीलें ही गिरा डाली

पहले तो मेरे हाथ से मेरा जाम ले लिया
फिर अपनी आंखों से हमें बेहद पिला डाली

– अभिषेक ‘अमन’


ख़ून-ए-चश्म= blood of eyes
इतरा= was behaving with pride, or arrogance
क़ैस= another name of Manjnu. He is famous for wandering in the desert naked after he went mad in the love of Laila.
दश्त= desert
वहशतें= madness
मकान-ए-दिल = house of heart
फ़सीलें= boundaries, walls

Ghazal #1

सन २०१३, इस ब्लॉग की इब्तदा का साल |

तब से अब तक इसने क्या क्या न देखा. किस्से, कहानी, कविताएँ, इंटरव्यू, आर्टिकल, रिव्यु…पर सब एक जुबान में…अंग्रेजी |

हिंदी, उर्दू में लिखा तो खूब पर पहुँचाया किसी को नही, किताब में रखे फूल के मानिंद | पर अब इरादा कर लिया है के अपनी मता-ए-जां आप तक पहुंचायी जाये. और हमने तो…

सुना है उसे भी है शेर-ओ-शा’इरी से शगफ़
सो हम भी अपने मोजिज़े हुनर के देखते है|
– अहमद फ़राज़

तो पेश ए नज़र है एक ग़ज़ल अब्बास ताबिश के शेर के साथ कि

ये जो फूल है हथेली पे उसे फूल न जान
मेरा दिल जिस्म के बाहर भी तो हो सकता है|


नज़र में रहा जिगर में नहीं उतरा
दूरी थी बहुत तो में सफ़र में नही उतरा

थक के चूर है सूरज अँधेरे के सफ़र से
कुछ रोज़ हो गयी है सहर में नही उतरा

हमारी खुश्क आखों ने की तय्यरियाँ बहुत सी
मगर एक भी आंसू नज़र में नही उतरा

सुकून-ए-साहिल से बावस्ता है शायद ये समंदर
नहीं तो क्यों कोई भंवर लहर में नही उतरा

जहाँ देखो वहां आंसू ही आँसू है
क्या कोई फ़रिश्ता इस शहर में नही उतरा

तुम्हारे इश्क़ की कश्ती में थी खराबियां बहुत सी
कश्ती से उतर जाना था मगर मैं नही उतरा

~ अभिषेक ‘अमन’


सहर = सुबह/ morning
खुश्क = dry
सुकून-ए-साहिल = peace of the sea shore
बावस्ता = लगाव